[पानी शायरी] हिंदी में छवि के साथ [Water Shayari] in Hindi with image flood

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चारो और पानी ही पानी ।
पता नहीं प्रकृति को चाहिये थी किसकी कुर्बानी ।


हस्ती खेलती दुनिया सब की उजड़ गयी कितनो की दुनीया ।
पता नहीं कितने लोग ।


इस जल प्रलय मे बिछड़ गये ।
तु इतना बेरहम हैं पता न था ।


किसका गुस्सा तुने किसपे उतारा ।
कितने बच्चो को अनाथ कर दिया ।


क्या गलती थी वहां के लोगो की ।
क्या ऐसी कोई गलती ज़िसकी कोई माफी ना थी ।


या ऊपरवाले का एक इशारा था ।
की अगर ना शुधरे ।
तो नजदिक हैं अंत ।


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By Shivam Mishra

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