imtehaan Shayari, Pariksha Shayari, jaane kaun

तब कौन जानता था ।

की कब क्या होगा ।

जो होना था ।

अब हो रहा है ।

सब हो रहा है ।

जैसे बाकी था कोई इम्तिहान



हम इम्तिहान के पिछे ।

भागते भागते इम्तिहान तो पास कर जाते है ।

पर ज़िंदगी के इम्तिहान मे फेल कर जाते है ।


हर कदम पर ज़िंदगी इम्तिहान लेती है ।



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Imtehaan Shayari Image,  Pariksha Shayari Image
 

By Shivam Kumar Mishra