Gumaan Shayari, Ghamand, Guroor, mat kar itna guroor

जो कल गाव ।

आज वो सेहेर है ।

कल फिर से गाव होगा ।

जो शुरू हुआ उसका अंत भि होगा ।

हर पल एक नयी शुरुवात ।

चाहे दिन हो या रात ।



कभी गुमान मत करना ।

पैसा आज है कल ना होगा ।

गोरा रंग कभी भी काला हो जायगा ।

कभी भि पतले से मोटे हो सकते हो ।

कुछ भि कभी भि हो सकता है ।

सब कुछ खो सकता है ।


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 Gumaan Shayari Image,
 

By Shivam Kumar Mishra

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