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ज़िंदगी एक ऐसी रेल है 

जिस सफर का मंजील ।

हम नहीं कोई और तय करता है ।



कितने मर जाते है इस रेल के सफर मे ।

क्यी बार मंजील पर लाश को तराशा जाता है ।


कम से कम सफर ध्यान से तय करना ।

ताकी मंजील तक सही सलामत पहुच पाओ ।

हादसे बहोत होते है आजकल ।

रेल युही नहीं बदनाम  है ।

क्यी बार हादसे गूमनाम है ।


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By Shivam  Kumar Mishra