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तुम मिले भि तो ।

अब जा कर ।

जहाँ मिलना ना मिलना एक समान ।

होना ना होना एक समान ।


जैसे रेल एक बार छूट जाये ।

तो फिर उस रेल का टीकेट हो या ना हो ।

सब एक समान ।

तुम मिले भि तो उमर के उस पढाओ पर ।

जहाँ जागना सोना एक समान ।

पाना खोना एक समान ।


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By Shivam Kumar  Mishra