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तुम मिले देर से ।

मुझे इसकी कोई परवाह नहीं ।

देर तो देर सही ।

ज़िंदगी मे दस्तक तो दी ।

एक दस्तक ही काफी थी ।

बाकी सब कुछ माफ ही ।

ज़िंदगी अब मेरी साफ है ।

मेरे शब्द का साथ है ।

जब जो होना है ।

तब वो होता है ।

इसके लिए क्या रोना है ।

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By Shivam Kumar Mishra

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