jindagi, jeevan, jindaganee

ज़िंदगी तेरा हिसाब गड़बड़ है ।

चाह के भि नहीं समझ पाते ।

तेरा गणित ।

गणित का कोई कितना भि बड़ा ज्ञानी क्यू ना हो ।

ज़िंदगी के हिसाब को नहीं समझता ।

क्या सच मे कोई गड़बड़ी है ।

या है कोई तेरा खेल ।

ज़िसका नहीं कोई मेल ।

ना जाने कब क्या हो जाता ।

कौन हमारा भाग्या विधाता ।

किसको क्या देना कब देना ।

ये तु भि ना जाने ।

पता नहीं तुम लोगो को कैसे पेहचाने ।

कोई है राजा तो कोई प्रजा ।

पता नहीं किसमे मजा ।

किसमे सजा ।

कोई मालामाल तो कोई फटेहाल है ।

ज़िंदगी तेरा गणित बवाल है ।

ना शुर है ना ताल है ।

फिर भि तु गायक कमाल है ।

नायक है तु ।

घायल है हम ।

तेरे हुस्न के कायल है ।

By Shivam Kumar Mishra