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वो अजनबी था मगर ।

अब अपना सा लगता है ।

एक हसीन सपना सा लगता है ।

कुछ ही वक़्त हुआ था उसे मेरे ज़िंदगी मे आये हुए ।


मगर ऐसा लगता है जन्मो जन्मो का रिश्ता है हमारा ।

आहिस्ता आहिस्ता ये रिश्ता और गेहरा होता गया ।

मै उसके आँखों मे खोता गया ।

दिल से दिल तक रिश्ता था हमारा  ।

एक दिन ना जाने वो कहाँ खो गया ।

मै रोता रहा ।

चाह कर भि ना रोक सका ।

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judayi Shayari
 

By ShivamKumar Mishra