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उजाले की हिमायात मे ।

अंधेरे की कीफायत मे ।

उजाले का चका चौंद ।

गया हम सब को रौंद ।


हर तरफ उजाला हि उजाला ।

फिर भि जूर्म का काला साया ।

उजाला हि उजाला ।

फिर भी ताले का सहारा ।


चोर लूटेरो की दुनीया ।

अंधेरे से डरते लोग ।

उजाले मे भि मरते लोग ।

रात दिन सब एक समान ।

फिर भि उजाले को करते सलाम ।



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By Shivam Kumar Mishra