jindagi daud, jeevan, bhag

हम सब प्रथम आने की दौड़ मे लगे पड़े है ।

जैसे ये ज़िंदगी कोई रेस हो ।

काल घुड़सवार है ।

और हम सब है घोड़े वो हमे दौड़ाता जा रहा है ।

और जिस दिन ये रेस खत्म हो गयी ।

वो लगाम खिच लेगा ।


By Shivam kumar Mishra