kabile tariff khoobsoorat

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तेरी तारीफ मे जो कहाँ सब सच कहाँ ।

तेरी तारीफ मे जो कहाँ सब दिल से कहाँ ।

तेरी तारीफ करते करते मुझे शायरी आ गयी ।

तेरे लिये मैं  ताज महल तो नहीं बना पाऊगा ।

पर तेरे तारीफ मे कितनी कविताये कर ड़ाली ।

तुने मूझे कवी बना दिया ।

मैं हु कवी तुम हो मेरी कविता ।


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मेरे शब्दो मे उतनी ताकत नहीं ।

जो तुम्हारी तारिफ कर सकु ।

जब भि तुम्हे देखता हु ।

देखता ही रह जाता हु ।

मंत्रमुग्ध हो जाता हु ।


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By Shivam Kumar Mishra


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