mushkurahat shayari, hasi, khusi, muskaan

 

mushkurahat, hasi, khusi

 

 

जब तुम मुशकुराते हो ।

मुझे खुश कर ज़ाते हो ।

मेरे सपने मे आते ज़ाते हो ।

चाहे कितनी भि गम दे ज़िन्दगी ।

तुम्हारी हसी मुझे सब भूला देती हैं ।


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तुमने  ने मेरी हसी को ।

तुम्हारी मुस्कराहट का गूलाम कर दिया ।

एक हसी ने मुझे तुम्हारा दीवाना कर गया ।


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By Shivam Kumar Mishra





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