samay, wakt, bela, kaal

 

samay, wakt, bela, kaal

 

बचपन बिता ऊमर भि बिती ।

बीत रही है ज़िंदगी ।

क्या करू ऐसी समय का ।

कैसे ज़ियू ये ज़िंदगी ।

वक़्त फिसल रहा है ।

हर एक सांस के साथ ।

हम ज़िंदगी खोते जा रहे ।

और मौत के करीब आते जा रहे है ।

ghadi pick

By Shivam Kumar Mishra

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