mausam shayari, hritu, kaal, varsha


mausam shayari, hritu, kaal, varsha

 

 

इंसान बदल जाते  है ।

ना जाने क्या खाते है ।

कल जो अपना दोस्त था ।

आज वो बेगाना हो गया ।

आज वो कितना सयाना हो गया ।

मौसम यूही बदनाम है ।


मौसम नहीं बदलके भि नहीं बदलता ।

इंसान नहीं बदल के भि बदल जाता है ।


हम मौसम का अनुमान तो लगा सकते है ।

इंसान का अनुमान भि नहीं लगाया जा सकता ।


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By Shivam Kumar Mishra




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